इंटरनेट पत्रकारिता स्वरूप और चुनौतियां

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सूचना तकनीकी के क्षेत्र में टेलीफोन, मोबाइल, रेडियो व टेलीविजन ने जिस नए युग का श्रीगणेश किया कम्प्यूटर के आगमन ने उसमे क्रांति ला दी। इंटरनेट पत्रकारिता ने रेडियो, टेलीविजन व मोबाइल जैसे सशक्त संचार माध्यमों के पश्चात एवं लंबे अंतराल तक गहरी नींद में सोए संचार को जगाने का बीड़ा कंप्यूटर ने बखूबी उठाया है।

गांव से लेकर शहरों तक, झोपड़ियों से लेकर महलों तक तथा धरती से लेकर अंतरिक्ष तक सूचना ने नई तकनीकों के सहारे हर जगह अपने पांव फैला दिए हैं।

संचार के विस्तृत क्षेत्र की आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए तीन सूक्ष्म शब्दों www ने संचार की गति को अत्यधिक तेज़ कर दिया है। एक उंगली के इशारे पर ही मीलों की दूरियों को पलक झपकते ही उपलब्ध करा कर सूचना क्रांति ने एक नए युग का सूत्रपात किया है। कहा जाता है कि वर्तमान में वह व्यक्ति सबसे श्रेष्ठ है जिसके पास ज्यादा सूचनाएं है। सूचना आदान प्रदान करने की संसार की सबसे बड़ी कड़ी है इंटरनेट।

इंटरनेट आज एक सर्वव्यापी सत्ता बनकर उभरा है। यह एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा किसी सैन्य सामग्री को प्रयोग किए बिना विश्व को जीता जा सकता है। अलादीन के चिराग की तरह तेज सूचना संवाहक के रूप में इंटरनेट ने पूरे विश्व के ज्ञान के खजाने को समय व दूरी की सीमाओं को लांघकर हमारे समक्ष प्रस्तुत कर दिया है।

1969 में जब अमेरिकी रक्षा विभाग ने कुछ कंप्यूटरों को जोड़कर एक नेटवर्क तैयार किया था। तब शायद उन्हें यह अनुमान नहीं था कि उनके द्वारा बोया गया यह अदना सा बीज एक दिन संपूर्ण विश्व को वट वृक्ष की भांति अपनी छाया से ओतप्रोत कर देगा।

90 के दशक के प्रारंभ से इंटरनेट का तेजी से विकास हुआ और इसने विश्व भर के लाखों प्रायोक्ताओ को एक दूसरे से जोड़ने और व्यक्तिगत आधार के अलावा व्यावसायिक उद्यमों और सरकारी एजेंसियों को भी एक दूसरे से जोड़ने की अपनी क्षमता के कारण इंटरनेट अभूतपूर्व रूप से योग्यता प्राप्त कर चुका है। 

इलेक्ट्रॉनिक मेल अथवा ईमेल को पहली बार 1972 में प्रस्तुत किया गया था। सन 1976 में क्वीन एलिजाबेथ ने अपना पहला ईमेल भेजा था। 16 से 18 नवंबर 2005 को ट्यूनीशिया में आयोजित विश्व इंफॉर्मेशन सोसाइटी शिखर सम्मेलन के दूसरे चरण में इंटरनेट के अधिक से अधिक लोकतंत्रिकरण और भूमंडलीकरण पर बल दिया गया। ताकि सूचना प्रौद्योगिकी की इस क्रांति का लाभ एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के दूरस्थ क्षेत्र तक भी पहुंच सकें।

वर्ष 2004 में अमेरिका में इंटरनेट सर्च इंजनों का प्रयोग करने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी और ऑनलाइन कार्यों में ईमेल के बाद इसे दूसरा स्थान प्राप्त हो गया। वर्ष 2005 में 94 मिलीयन अमेरिकी वयस्क जनसंख्या में 63% लोगों ने सर्च इंजन का प्रयोग किया। जबकि जून 2004 में यह संख्या 56% थी। यह जानकारी 20 नवंबर 2005 को प्यू इंटरनेट और अमेरिकी लाइफ परियोजना ने दी। इन प्रयोग कर्ताओं में साधन-संपन्न और सुशिक्षित लोगों तथा ब्रॉडबैंड कनेक्शन रखने वाले लोगों की संख्या सर्वाधिक थी। फिर भी ईमेल अभी भी लोकप्रिय इंटरनेट कार्य है जिसका प्रयोग 70% जनसंख्या द्वारा किया जाता है।

आज के समय में इंटरनेट सुविधाओं का उपयोग करने वालों की संख्या हमारे देश में भी बहुत अधिक है। इंटरनेट तकनीक भारतीय जीवन के हर पहलू को प्रभावित कर रही है। इंटरनेट युग शिक्षा चिकित्सा संचार सार्वजनिक सेवा मनोरंजन और प्रशासन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका के साथ अपने प्रभुत्व का प्रमाण दे रहा है।

संचार के सबसे शक्तिशाली माध्यम के रूप में इंटरनेट ने संचार के सभी परंपरागत मॉडलों व प्रक्रियाओं को गौण बना दिया है। विश्व संचार की इस तकनीक ने हमें अपना दास बना लिया है और इसी कारण इंटरनेट में किसी भी प्रकार का व्यवधान हमें चिंतित कर देता है। अगर कहा जाए कि आणविक शक्ति के विकास के बाद इंटरनेट विश्व की सबसे बड़ी उपलब्धि है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

पिछले कुछ समय तक हमारे पास सूचना के तीन माध्यम थे पत्र-पत्रिकाएं, रेडियो और टेलीविजन परंतु अब कलम विहीन पत्रकारिता के रूप में साइबर जर्नलिज्म का उदय हुआ है। 

जिस समाचार के लिए कुछ समय पहले तक घंटों या दिन का इंतजार करना पड़ता था। वह अब पल भर में हमारे दृश्य पटल पर होता है। इसे विस्तार से पढ़ा भी जा सकता है तथा संग्रहित भी किया जा सकता है। इसके द्वारा रोजमर्रा के रूटीन समाचारों से लेकर सिनेमा, फैशन, जीवन शैली, शिक्षा, समाज, विज्ञान, खेल, रहस्य, रोमांच से लेकर ज्योतिष तक सभी विषयों पर ताजा तथा उपयोगी सामग्री प्राप्त की जा सकती हैं। 

महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय समाचार पत्रों के इंटरनेट संस्करणों ने एक नई प्रणाली ई-जर्नलिज्म की शुरुआत की है। कुछ समय पहले तक हमें समाचार पढ़ने संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु समाचार पत्र, समाचार सुनने के लिए रेडियो तथा समाचार देखने के लिए टेलीविजन पर निर्भर रहना पड़ता था। वहीं अब समाचार पढ़ने, सुनने व देखने के लिए एक स्थान इंटरनेट समाचार पोर्टल के रूप में विकसित हो चुका है। 

इंटरनेट पत्रकारिता पर काफी लंबे समय तक अंग्रेजी भाषा का कब्जा रहा है। परंतु गत 10-12 वर्षों से हमारी मातृभाषा हिंदी का प्रयोग भी समाचार पोर्टल के रूप में किया जाने लगा है।

“नई दुनिया” अखबार द्वारा “वेब दुनिया” के नाम से हिंदी भाषा में पहला इंटरनेट पोर्टल शुरू होने के साथ ही हिंदी समाचारों का वेबकरण हुआ  इसके पश्चात “नेट जाल” नामक ई समाचार पोर्टल ने अपनी उपस्थिति इंटरनेट पर दर्ज कराई। 

हिंदी समाचार पोर्टल के बढ़ते आकर्षण को देखते हुए कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठनों जैसे Google, Rediff, BBC जैसे बड़े-बड़े पोर्टल ने भी हिंदी समाचार सेवा शुरू की।

इंटरनेट समाचार सेवा को अपनी प्रतिष्ठा का प्रतीक मानकर अधिकतर हिंदी समाचार पत्रों ने इंटरनेट समाचार पोर्टल शुरू किए। हमारी मातृभाषा में ताजा-तरीन समाचारों से लैस वेबसाइटों ने समाचारों की रूपरेखा को नया आयाम प्रदान किया है। हिंदी समाचार पोर्टल के रूप में jagran.com ने विश्व की प्रमुख समाचार वेबसाइटों में उच्च स्थान पाकर भारत के मस्तक को और ऊंचा कर दिया है।

वास्तव में सूचना प्रौद्योगिकी और आधुनिक संचार क्रांति के इस युग में यदि हम यह स्वीकार कर ले कि भारत की एक संपर्क भाषा आवश्यक है और वह केवल हिंदी हो सकती है तो हिंदी उस चुनौती का सामना करने में समर्थ हो जाएगी जो उसके सामने मुंह बाए खड़ी है। इंटरनेट एक ऐसा मंच है जहां से हम अपनी मातृभाषा को अंतरराष्ट्रीय पटल पर चमका सकते हैं।

एक सर्वे के अनुसार जो लोग रोजाना दो-तीन घंटे तक इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं, उनमें से केवल 7 प्रतिशत लोग इंटरनेट पर समाचार पढ़ते हैं, पर हिंदी समाचार पढ़ने वालों की संख्या 4% पाई गई है। हिंदी पत्रकारिता के लिए सुखद बात यह है कि यह संख्या अंग्रेजी समाचार पाठकों से ज्यादा है। ई-समाचार पढ़ने वाले लोगों में से अधिकतर ने माना है कि वे शेयर बाजार के भाव जानने के लिए और खेलों की जानकारी लेने के लिए इंटरनेट समाचार पत्रों का इस्तेमाल करते हैं।

इस प्रकार हम देख सकते हैं कि भले ही इंटरनेट पर समाचार पत्रों को कम पढ़ा जाता है। परंतु काफी अल्प समय में हिंदी के ई-समाचार पत्रों ने जिस प्रकार से सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं उससे हिंदी पत्रकारिता के इस नए रूप का भविष्य अवश्य ही उज्जवल होगा।

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धन्यवाद

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