किसान “बुझती आंखों में आशा की किरण”

रोज की तरह सुबह के 4:00 बजे थे, लड़खड़ाते पैरों के साथ टीमटीमाती हुई आंखें खुली, जो इशारा कर रही थी कि रात भर नींद नहीं आई।

किसान "बुझती आंखों में आशा की किरण"
किसान “बुझती आंखों में आशा की किरण”

आखिर नींद आती भी कैसे, रात को अचानक हुई ओलावृष्टि एवं वर्षा ने खेत में पकी खड़ी गेहूं की फसल को बर्बाद कर दिया था।

आंखों में आंसू थे, लड़खड़ाते पैरों में हिम्मत बंधाई और रहम भरी नजरों से बादलों की ओर देखा।

लेकिन बादल थे कि अभी भी रहम करने को तैयार नहीं थे। चला नहीं गया तो अंदर से पत्नी आई और सहारा देकर बोली कि चिंता ना करो भगवान ने कष्ट लिखें है तो ‘सह लेगे’।

पशुओं की नजर अपने मालिक की स्थिति देखकर व्याकुल हो गई थी। किसान ने पशुओं को चारा डाला लेकिन जैसे आज पशुओं को भूख नहीं थी। कुदरत की मार ने सब कुछ छीन लिया था।

एक चिंता ने मन को और व्याकुल कर दिया था। आने वाले 3 महीने बाद ही बेटी की शादी भी है। बेटी ने पिता की व्याकुलता देखकर पिता का हाथ पकड़ कर कहा कि पिताजी आप चिंता मत करिए मैं अभी शादी नहीं करूंगी। यह सुनकर सबकी आंखें भर आई।

एक किसान का हौसला ही था जो उसे फिर से खड़ा होने के लिए प्रेरित कर रहा था। आज खेत पर जाने का मन नहीं किया, पता चला कि घर में बस 2 दिन का राशन है। मन चिंता में डूब गया।

एक उम्मीद थी कि थोड़ा सा गन्ना भुगतान बाकी था। जो गन्ना पेराई के 7 – 8 महीने के बाद तक भी नहीं आया था।

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उसी उम्मीद से बैंक गया कि कुछ पैसा आया होगा, वहां पहुंचकर पता किया तो पता चला कि बीते 3 महीने से कोई payment नहीं आया है।

अगले दिन साहूकार के पास जाकर कुछ पैसे ब्याज पर मांगे तो साहूकार ने बिना कोई सोने की चीज गिरवी रखे पैसे देने से मना कर दिया।

कुछ सोना बेटी की शादी के लिए खरीदा था। लेकिन फिलहाल उनको गिरवी रखने के अलावा कोई चारा नहीं था।

अगले दिन सोने को गिरवी रखकर कुछ पैसे ब्याज पर आ गए। जिससे घर का कुछ राशन और बच्चों के स्कूल की कुछ दिनों की फीस का इंतजाम हो गया।

अब बस एक ही चीज पास थी। वह थी ‘आशा की किरण‘। यह कहानी नहीं है, यह वास्तविकता है, हम किसानों की।

किसानों की आबादी देश में 70 प्रतिशत है। देश की अर्थव्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण कारक है। कहने के लिए तो देश 70 साल पहले आजाद हो गया।

लेकिन किसान की बदहाली अभी तक कम ना हुई। देश के अन्नदाता का आत्महत्या करना देश पर बदनुमा दाग है। हर साल अपनी लाचारी और बदहाली की वजह से ना चाहते हुए भी कितने किसान आत्महत्या कर रहे हैं।

तकनीकी और संसाधन से पैदावार तो बड़ी है। लेकिन फसल का उचित दाम एवं समय पर भुगतान ना मिलने से अभी भी किसान की स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं आया है।

हर एक व्यापारी अपनी वस्तु का दाम स्वयं तय करता है। लेकिन किसान की फसल का दाम किसान तय नहीं कर सकता।

किसान की फसल, व्यापारी उसकी मजबूरी का फायदा उठाकर ओने- पोने दाम में खरीद लेता है। व्यापारी उसी चीज को बाजार में चार गुनी कीमत पर बेचता है।

किसानो की इसी परिस्थिति के कारण कोई युवा खेती नहीं करना चाहता है।

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कृषि क्षेत्र को आकर्षक बनाने के लिए सरकार को जल्द ही कदम उठाने होंगे वरना बहुत देर हो जाएगी। किसानो की स्थिति के सुधार के लिए निम्नलिखित बिंदु सहायक बिंदु हो सकते हैं।

  1. सरकार को शहर एवं गांव की दूरी को पाटना होगा। सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी होगी कि किसान अपना माल direct मंडी में बेचे। जो सरकार द्वारा घोषित मूल्य पर खरीदा जाए। जिससे किसानो को व्यापारियों के चंगुल से बचाया जा सके।
  2. किसान को उसकी फसल का उचित दाम मिले। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश सहायक सिद्ध हो सकती है। किसान को उसकी लागत से डेढ़ से दोगुना मूल्य मिले। जिससे उसको बचत दिखाई दे और वह मेहनत से खेती कर अपनी आजीविका चला सके।
  3. किसान की फसल का तुरंत नगद भुगतान हो अथवा 2 दिन के अंदर किसान के बैंक अकाउंट में पैसा transfer हो जिससे किसान साहूकार और ब्याज से बच सकें।
  4. किसान की ऋण माफी एक दूरदर्शी योजना नहीं है। अपितु इससे देश पर भार पड़ता है। कुछ किसान इसका दुरुपयोग करते हैं। इस पैसे का उपयोग सब्सिडी के रूप में किसान को बहुत कम कीमत पर खाद, कीटनाशक, बिजली ट्यूबवेल कनेक्शन उपलब्ध कराने में करना चाहिए।
  5. जो भी किसान अपना क्रेडिट कार्ड समय पर जमा करते हैं, उनसे मात्र 1 प्रतिशत ब्याज ही वसूला जाए। समय से ना जमा करने पर कुछ समय की मोहलत दी जाए। अन्यथा ज्यादा ब्याज वसूला जाए जिससे अनुशासन बना रहे।
  6. किसान का बिजली बिल, फसल बीमा फ्री अथवा बहुत कम कीमत पर दी जाए।
  7. एक ऐसी व्यवस्था की जाए कि बड़ा किसान अपने पुत्रों के नाम पर बहुत कम पैसों में रजिस्ट्री करा सकें। जिससे बड़े एवं छोटे किसानों की सही संख्या प्रकाश में आएगी। बड़े किसानों की छूट खत्म हो।

अंत में मैं यह कहना चाहूंगा कि देश की खुशहाली का रास्ता किसान की समृद्धि से होकर ही गुजरता है। सरकार को वह सब उपाय करने होंगे जिससे देश का किसान खुशहाल हो और किसान भूखा ना सो सकें।

समृद किसान, समृद भारत

अन्नदाता की जय हो।

यह लेखक के व्यक्तिगत विचार है।

धन्यवाद

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Written By – Ankur Bhardwaj

(Youngster motivator & social worker)

11 thoughts on “किसान “बुझती आंखों में आशा की किरण”

  1. किसान की ऋण माफी एक दूरदर्शी योजना नहीं है। अपितु इससे देश पर भार पड़ता है। कुछ किसान इसका दुरुपयोग करते हैं। इस पैसे का उपयोग सब्सिडी के रूप में किसान को बहुत कम कीमत पर खाद, कीटनाशक, बिजली ट्यूबवेल कनेक्शन उपलब्ध कराने में करना चाहिए।
    Very Well said Sir

  2. देश की खुशहाली का रास्ता किसान की समृद्धि से होकर ही गुजरता है।

  3. मुझे नहीं लगता यह सरकार इस बारे में सोचेगी
    पूरी तरह किसान विरोधी सरकार है
    पिछले कई सालों से गन्ने का रेट जो का त्यों है जबकि लागत में बढ़ोतरी होती जा रहे हैं

  4. सर बड़े दुख की बात है आजादी के इतनी समय बाद भी किसानों की स्थिति के बारे में किसी सरकार ने गंभीरता से काम नहीं किया
    आपने स्थिति सुधारने के लिए अच्छे उपाय बताए हैं अगर सरकार इन्हें अमल में लाए तो किसानों की स्थिति अच्छी हो सकती है

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