डॉक्टर ऐसे क्यों करते हैं? खासकर गरीबों के साथ

डॉक्टर ऐसे क्यों करते हैं? खासकर गरीबों के साथ

डॉक्टर ऐसे क्यों करते हैं? खासकर गरीबों के साथ

मेरा नाम कृष्णा वर्मा है। मैं शाहाबाद जिला हरदोई में रहती हूं। आज देश अपना भारत देश, दुनिया के अधिकतर देश एक बीमारी से लड़ रहे हैं, जिसका नाम कोविड19 कोरोना हैं।

सभी को पता है अभी तक उसकी कोई वैक्सीन नहीं बनी है, उससे बहुत सी मौतें हो रही है। हमारे देश में भी ऐसा ही है। पूरी दुनिया में इस बीमारी से हाहाकार मचा हुआ है, बहुत लोग मर रहे हैं। 

हमारे देश में भी लगातार Corona मरीजों की संख्या बढ़ रही है। भारत के सभी अस्पताल बस Corona के मरीजों को ही देख रहे हैं। 

मेरा यह पूछना है आप सभी से कि क्या सिर्फ जो Corona का मरीज है वह ही मर सकता है। अगर कोई और किसी बीमारी से मर रहा है तो उसका कोई इलाज नहीं होगा। 

मेरे परिवार का सदस्य तो अब इस दुनिया से चला गया है, जो मैं कहना चाहती हूं उन बातों से वह वापस नहीं आने वाला। 

लेकिन मेरा सिर्फ यह पूछना है कि जितने भी अस्पताल है वह सिर्फ Corona के मरीजों को ही देखगे। 

अगर किसी के परिवार का कोई सदस्य अस्पताल के बाहर मर रहा है और वह कोरोना का मरीज नहीं है तो क्या उसे मरने दे, बताइए मुझे। 

14 अप्रैल 2020 को मेरे पापा को अचानक पेट में दर्द उठा। दर्द की दवाई देने के बाद भी उनका दर्द कम नहीं हो रहा था। पेट में दर्द उठने के बाद वो तड़प रहे थे। 

हम लोग उन्हें अस्पताल ले गए। उनको किसी ने नहीं देखा, पापा अस्पताल के बाहर दर्द से तड़प रहे थे लेकिन कोई डॉक्टर नहीं आया, कोई कुछ देखने नहीं आया।

फिर मैंने 108 नंबर पर कॉल करके एंबुलेंस बुलाई। हम उन्हें दूसरे हॉस्पिटल ले गए, लेकिन कोई डॉक्टर देखने नहीं आ रहा था। हम उन्हें प्राइवेट हॉस्पिटल भी लेकर गए लेकिन प्राइवेट हॉस्पिटल वाले भी गेट नहीं खोल रहे थे। 

फिर गवर्नमेंट हॉस्पिटल लेकर गए, अभी भी उन्हें देखने कोई नहीं आया। फिर हम पापा को जिला हॉस्पिटल हरदोई ले गए। वहां भी वह दर्द से तड़पते रहे। 

उनका पेट सूज गया था लेकिन कोई डॉक्टर उन्हें नहीं देख रहा था, उन्हें कोई डॉक्टर छू नहीं रहा था।

फिर हम लोगों ने कहा, यहां रुकने से कोई फायदा नहीं है, चलो लखनऊ लेकर चलते हैं। फिर 108 नंबर पर कॉल करके एक एंबुलेंस बुलाई और लखनऊ के लिए रेफर करा कर, पापा को लखनऊ ले गए। 

लखनऊ मैं कोई केजीएमयू मेडिकल कॉलेज है, वहां भी उन्होंने पापा को एडमिट नहीं किया। उन्होंने कहा कि यहां सिर्फ Corona के मरीज एडमिट होगे और किसी को नहीं देखा जाएगा, कोई admit नहीं होगा यहां।

हमने बहुत रिक्वेस्ट की गिड़गिड़ाए पर किसी ने हमारी कोई बात नहीं सुनी और पापा को एडमिट नहीं किया। वह तड़पते रहे पेट दर्द से, उनके खून की कमी हो गई थी। 

फिर हमें किसी ने बताया कि लखनऊ केसर बाग में कोई बलराम हॉस्पिटल है। हम पापा को बलराम हॉस्पिटल लेकर गए लेकिन वहां पर भी वहीं हुआ जो सब जगह हो रहा था। वे लोग भी एडमिट नहीं कर रहे थे। 

बहुत रिक्वेस्ट करने पर उनको एडमिट किया गया लेकिन उन्हें देखने के लिए कोई डॉक्टर नहीं आया। उन्हें खून की बहुत कमी हो गई थी। 

जब तक कोई डॉक्टर उन्हें देखने आया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और पापा दुनिया से जा चुके थे। 

इस बात को कहने का मेरा मकसद सिर्फ यही है कि डॉक्टर्स के लिए सभी बीमारियों के मरीजों के लिए एक समान भावनाएं होनी चाहिए।

मेरे पापा तो नहीं आयेंगे अब इस दुनिया में कभी वापस। लेकिन मैं सभी Doctor’s से कहना चाहती हूं कि देश Corona से लड़ रहा है और आप लोग बहुत मेहनत से Corona मरीजों के इलाज के लिए लगे हुए हो।

लेकिन कोराना के अलावा कोई मरीज किसी और बीमारी से मर रहा है तो आपका फर्ज नहीं बनता उस मरीज को देखना। आप डॉक्टर सिर्फ कोरोना के लिए ही बने हो। आप कैसे किसी को बिना इलाज के मरता हुआ छोड़ सकते हो।

मैं अपने घर में सबसे बड़ी हूं। मेरे एक छोटा भाई है 15 साल का और मेरी छोटी बहन है 17 साल की। मेरी मम्मी थी वह गुजर गई थी, पापा थे वह भी चले गए। अब मुझे ही अपने भाई बहनों को पालना है।

मेरी सरकार से अपील है, मेरे पापा तो चले गए इस दुनिया से वह तो कभी वापस आने वाले नहीं। लेकिन जैसा मेरे पापा के साथ हुआ है, वह किसी के पापा के साथ ना हो। किसी और के बच्चों पर वह ना गुजरे जो हम पर गुजर रही है। 

मैं सभी Doctor’s से भी प्रार्थना करना चाहती हूं कि कृपया दूसरी बीमारियों से परेशान लोगों को भी थोड़ा समय दे, आपके पास आने वाले सभी मरीजों और उनके परिवार वालों को आपसे बहुत उम्मीद होती है।

धन्यवाद

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