सकारात्मक सोच ने फिर से स्वस्थ होने में मदद की

Positive Thinking Helped Recover

एक कहावत है ‘जैसा सोचोगे वैसा ही पाओगे’। इसी कहावत को सही साबित किया है इंग्लैंड की 102 साल की बुजुर्ग महिला ने।

इस महिला को covid19 कोरोना positive होने के कारण लंदन के एक हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। 102 साल की उम्र होने के कारण महिला के ठीक होने के chances बहुत कम थे।

लेकिन अपनी सकारात्मक सोच की वजह से वह covid19 Corona जैसी खतरनाक बीमारी को मात देकर पूरी तरह स्वस्थ हो गई। अपनी सकारात्मक सोच की वजह से इस महिला ने लोगों के सामने एक मिसाल पेश की है।

102 वर्ष की इस बुजुर्ग महिला ने सभी बाधाओं को पार करते हुए अपने उपचार के दौरान अपने आसपास के माहौल को इतना सकारात्मक बना दिया था कि इस उम्र में भी Corona को मात देकर पूरी तरह स्वस्थ हो चुकी है।

यह इस बात को भी दर्शाता है की ‘इंसान कभी बूढ़ा नहीं होता, बूढ़ी होती है तो उसकी सोच’। अगर हम अपने आप को जवान मानोगे तो हम जवान हैं, अगर बूढ़ा मानोगे तो हम बूढ़े है और बच्चा मानोगे तो बच्चा।

अगर हम अपने दिमाग में सकारात्मक विचार बनाए रखें तो फिर हमें अपनी सोच से किसी भी बीमारी के खिलाफ लड़ने में शक्ति मिलेगी

हॉस्पिटल में रहने के दौरान वह सभी का मनोरंजन करती रहती और अपनी बातों से सभी को सकारात्मक विचारों के लिए प्रेरित करती हुई अपने आसपास के लोगों के मन से कोरोना का भय निकाल देती। जो भी कोई उस महिला से मिलता, उससे प्रभावित हो जाता था।

इस उम्र में और इस खतरनाक बीमारी से लड़ते हुए भी उस महिला के माथे पर चिंता के तनिक भी भाव ना थे। उसने अपने साथ साथ दूसरे मरीजों को भी Positive Thinking के लिए प्रेरित किया। यहां तक कि डॉक्टर और नर्स जो लगातार काम कर रहे हैं, उनमें भी एक ऊर्जा डालने का काम किया।

उस 102 साल की बुजुर्ग महिला ने हॉस्पिटल का माहौल इतना सकारात्मक व मनोरंजक बना दिया था कि जब वह स्वस्थ होकर घर जा रही थी तो डॉक्टरों और नर्सों ने इकट्ठा होकर तालियां बजाकर उसे विदाई दी।

इस बुजुर्ग महिला से हम सभी को यह शिक्षा मिलती है कि परिस्थिति कितनी भी प्रतिकूल क्यों ना हो जाए हमें घबराना नहीं चाहिए और प्रतिकूल परिस्थितियों का डटकर सामना करना चाहिए।

एक्सपर्ट्स और विद्वान लोगों का मानना है कि हम अपने दिमाग को जिस प्रकार के सिग्नल भेजते हैं, दिमाग उसी प्रकार का कार्य करने में ऊर्जा लगा देता है।

अर्थात अगर हम किसी बारे में नकारात्मक विचार लगातार बनाए हुए हैं तो दिमाग उसे ऐसा करने के लिए प्रेरित करता है और अगर हम सकारात्मकता से किसी बारे में सोचते हैं तो दिमाग अपनी ऊर्जा उस कार्य को सफल करने मे लगाएगा।

इसलिए हमें नकारात्मक विचारों को त्यागने की कोशिश करनी चाहिए और अपने दिमाग में अच्छे और स्वस्थ विचार लाने चाहिए। इन विचारों से अपने आसपास का माहौल भी सकारात्मक बना देना चाहिए।

अगर आप ऐसा करोगे तो आपकी जीत निश्चित ही होगी।

धन्यवाद

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Written by

Hariom Poswal

9 thoughts on “सकारात्मक सोच ने फिर से स्वस्थ होने में मदद की

  1. इसलिए हमें नकारात्मक विचारों को त्यागने की कोशिश करनी चाहिए और अपने दिमाग में अच्छे और स्वस्थ विचार लाने चाहिए।

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