CSR Corporate Social Responsibility

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What is CSR Corporate Social Responsibility?

सीएसआर कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी क्या है?

CSR Corporate Social Responsibility एक ऐसा तरीका है जिसके माध्यम से कोई कंपनी आर्थिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय रूप से महत्वपूर्ण लक्ष्यों में संतुलन साधती है। इसे “ट्रिपल बॉटम लाइन अप्रोच” (TBL approach) कहा गया है। सीएसआर चैरिटी अथवा परोपकार से भिन्न है, क्योंकि सीएसआर व्यावसायिक प्रबंधन से जुड़ी अवधारणा है। CSR (Corporate Social responsibility) के अंतर्गत बड़ी कंपनियों को अपने शुद्ध लाभ का 2% सामाजिक उत्तरदायित्व के लिए खर्च करना होता है।

CSR Corporate Social Responsibility भारत के कॉर्पोरेट जगत के लिए वर्ष 2015 विशेष महत्व रखता है। इस वर्ष पहली बार भारत की बड़ी कंपनियां ने सामाजिक क्षेत्र में किए गए खर्चों का ब्यौरा प्रस्तुत किया। वस्तुतः 1 अप्रैल 2014 को भारत विश्व का पहला ऐसा देश बन गया जिसने कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी को विधिक रूप से लागू किया। 

The companies act 2013 द्वारा उन कंपनियों, जिनका शुद्ध वार्षिक लाभ 5 करोड़ रुपए अथवा अधिक है, अथवा जिनका शुद्ध मूल्य 500 करोड रुपए अथवा अधिक है अथवा वार्षिक टर्नओवर 1000 करोड़ रुपए अथवा अधिक है, के लिए अपने गत 3 वर्षों के शुद्ध औसत लाभ का कम से कम 2% कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के तहत व्यय करना अनिवार्य बना दिया गया है ।

2013 कंपनी अधिनियम के अनुसार इन कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने सीएसआर (कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी) उद्देश्य को निर्धारित करने तथा उनकी निगरानी करने के लिए एक समिति गठित करें। साथ ही कंपनियों को अपनी वार्षिक रिपोर्ट में अपनी इन सीएसआर संबंधी गतिविधियों को स्पष्ट करने को कहा गया है। सीएसआर के अंतर्गत कंपनियां स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता, पर्यावरण आदि क्षेत्रों के कार्य कर सकती है। इनको सीएसआर के अंतर्गत अपने कर्मचारियों को लाभान्वित करने अथवा कंपनी के कार्यों से जुड़ी गतिविधियों को शामिल करने से मना किया गया है।

संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (यूनिडो) के अनुसार corporate social responsibility प्रबंधन से जुड़ी अवधारणा है। जिसके अंतर्गत कंपनियां अपने व्यवसाय संबंधी क्रियाकलापों के साथ सामाजिक एवं पर्यावरणीय चिंताओं को समन्वित करती है। इसके साथ ही वे अपने अंशधारकों के हितों का भी ध्यान रखती है।

यूनिडो द्वारा विकासशील देशों में लघु एवं मध्यम उद्यमों में सीएसआर की अवधारणा को प्रोत्साहन देने के प्रयास किए जा रहे हैं। इससे ये कंपनियां न केवल सामाजिक एवं पर्यावरणीय मानकों पर खरी उतर रही है तथा उनका आर्थिक लाभ भी नकारात्मक ढंग से प्रभावित नहीं हो रहा है। इसके लिए टीबीएल एप्रोच अपनाया जाता है।

स्मरण योग्य बात यह है कि यूनिडो द्वारा सीएसआर की जो परिभाषा दी गई है वह पूर्णत: सर्वमान्य नहीं है तथा इसमें अन्य रूप भी प्रचलन में है। उदाहरण के लिए इसका एक प्रचलित रूप नैगमिक परोपकार (corporate philanthropy) जिसके अंतर्गत कंपनी कला, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण आदि से जुड़ी स्वयंसेवी संस्थाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

सीएसआर (कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी) कॉर्पोरेट आत्म नियमन एक व्यापार मॉडल में एकीकृत का एक रूप है। CSR एक स्वनियामक तंत्र है जिसके तहत एक व्यापार पर नज़र रखता है और कानून, नैतिक मानकों और राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय मानदंडों की भावना के साथ अपनी सक्रिय अनुपालन सुनिश्चित करता है। 

सीएसआर के उद्देश्य सकारात्मक सार्वजनिक संबंध और उच्च नैतिक मानकों के माध्यम से लंबी अवधि के लाभ और शेयरधारक विश्वास बढ़ाने के लिए कॉर्पोरेट कार्यों के लिए जिम्मेदारी लेने के द्वारा व्यापार और कानूनी जोखिम को कम करने के लिए है। सीएसआर रणनीतियों के द्वारा पर्यावरण और उपभोक्ताओं, कर्मचारियों, निवेशकों, समुदायों, और अन्य लोगों सहित हितधारकों पर सकारात्मक प्रभाव बनाने के लिए कंपनी को प्रोत्साहित करते हैं।

सीएसआर से ही जुड़ा एक आयाम सीएसवी (क्रिएटिव शेयर वैल्यू) की अवधारणा है। यह अवधारणा इस विचार पर आधारित है कि व्यावसायिक सफलता तथा सामाजिक कल्याण परस्पर निर्भर है। किसी भी व्यवसाय की सफलता हेतु स्वस्थ एवं शिक्षित कार्यबल संसाधनों की सतत् उपलब्धता तथा कुशन सरकारी तंत्र की आवश्यकता होती है। दूसरी तरफ किसी समाज के विकास हेतु आवश्यक है की व्यवस्थाएं फले फूले तथा समृद्धि एवं रोजगार का सृजन करें, परोपकार एवं कर संग्रह में वृद्धि हो। यही कारण है की अनेकानेक बड़ी कंपनियां अपनी व्यवसायीक रणनीति को सीएसआर से जोड़ रही है। व्यावसायिक कंपनियों के समाज से जुड़े उत्तरदायित्व का एक आयाम है सोशल एकाउंटिंग (सामाजिक लेखा) की अवधारणा। इसके द्वारा किसी व्यावसायिक प्रतिष्ठान के आर्थिक पक्ष से जुड़े कार्यों के समाज एवं पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन किया जाता है इसके द्वारा कॉर्पोरेट उत्तरदायित्व पर बल दिया जाता है तथा विभिन्न मानकों के आधार पर इसका आकलन किया जाता हैं।

भारत में सीएसआर से जुड़े तथ्य

  • भारत विश्व का पहला देश है जहां कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी संबंधी कानून बनाया गया है।
  • वर्ष 2014 15 में पहली बार कंपनियों को अपनी वार्षिक रिपोर्ट में सीएसआर निवेश को दर्शाने को कहा गया।
  • भारत में लगभग 10000 कंपनियां सीएसआर पहल के अंतर्गत आच्छादित हुई है।
  • लगभग दो तिहाई कंपनियां सीएसआर के तहत निर्धारित परिणाम में निवेश करने में असफल रही है।
  • अधिकांश निवेश शिक्षा तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुए हैं।
  • कंपनियों के अनुसार सीएसआर के नियमों में होने वाले निरंतर बदलाव के फलस्वरूप उपजे भ्रम के कारण अपेक्षित मात्रा में निवेश नहीं हुआ।
  • सीएसआर संबंधी दायित्वों की पूर्ति में असफल रहने वाली कंपनी के लिए कोई दंडात्मक विधान नहीं है ऐसी कंपनियों से मात्र स्पष्टीकरण की अपेक्षा की जाती है।

धन्यवाद

13 thoughts on “CSR Corporate Social Responsibility

  1. भारत में लगभग 10000 कंपनियां सीएसआर पहल के अंतर्गत आच्छादित हुई है

  2. CSR Corporate Social Responsibility एक ऐसा तरीका है जिसके माध्यम से कोई कंपनी आर्थिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय रूप से महत्वपूर्ण लक्ष्यों में संतुलन साधती है। इसे “ट्रिपल बॉटम लाइन अप्रोच” (TBL approach) कहा गया है। सीएसआर चैरिटी अथवा परोपकार से भिन्न है, क्योंकि सीएसआर व्यावसायिक प्रबंधन से जुड़ी अवधारणा है। CSR (Corporate Social responsibility) के अंतर्गत बड़ी कंपनियों को अपने शुद्ध लाभ का 2% सामाजिक उत्तरदायित्व के लिए खर्च करना होता है।

    सर अधिकतर कंपनियों ने इससे बचने के या कम से कम खर्च करने की रास्ते ढूंढ लिए है

  3. सीएसआर के अंतर्गत कंपनियां स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता, पर्यावरण आदि क्षेत्रों के कार्य कर सकती है।

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